बंदरों को ये वोटर उस्तरा देने लगे Funny Hindi Poem on Political Parties

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poem on indian politics in hindi
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बंदरों को ये वोटर उस्तरा देने लगे 


व्यंग्य ऐसे वो मार देता है 
दिल में खंजर उतार देता है 
नाक अपने राष्ट्र की ,कैसे भला बच पाएगी 
बंदरो को जब ये वोटर उस्तरा देने लगे 
सत्ता अपने दोष छिपाए बैठी 
जनता भी आक्रोश छिपाए बैठी 
वे चिपके है शासन से 
हिलें न अपने आसन से 
आशवासनो की खाली सब प्यालिया मिलीं ,
मांगी जो रोटी हमने ,तो गलियां मिलीं। 

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