धड़कने सरे शहर की बंद थी Hindi Poems on Social Evils

Here is Best Poems on Communalism in Hindi and Social Evils Or Riots which happens due to Political Parties where innocent People Suffer and Politicians take advantages of those people.

poems on communalism in hindi
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धड़कने सरे शहर की बंद थी 


धड़कने सरे शहर की बंद थी 
वक्त कर्फ्यू मैं रहा ठहरा हुआ ,
यूँ मनुष्य में पशुता आई 
शहर जला शमशान हो गया ,
एक घर तो दिखा बना कर के 
बेवजह बस्तियां जलाता है 
काट लेता है वह अंघूठे जब
सूद में तब उधर देता है 
आईने सपनो के , चकनाचूर जिसने कर दिए ,
हम उसी पत्थर को अब तक देवता कहते रहे 
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