Poem on Education in Hindi | शिक्षा के महत्व पर कविता

Best short Hindi Poem on Education in Hindi, हमारे जीवन में शिक्षा के महत्व पर कविता लिखी हुई - पढ़ना-लिखना सोचना. शिक्षा के बिना हमारा जीवन अधूरा है इस बात तो हम सब जानते हैं , जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमारा पढ़ना लिखना बहुत ज़रूरी है.

Every single child should be given education it makes there life secure and financially stable. As when there is nothing left to do in life only thing which can help you to grow financially is Education. Because Education do not need Capital.

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Poem on Education in Hindi


पढ़ना -लिखना 

पढ़ना -लिखना सोचना ,चिन्तन मनन विचार
ये है मानव जाति के ,उन्नति के आधार
उन्नति के आधार ,ज्ञान का पथ संघाने
जी है अनपढ़ मूढ़ ,बढ़ो की बात न मानें
कह भगवत कविराज ,चहिए अंतर् दिखना
बहुत जरूरी अतः ,मनुज का पढ़ना -लिखना 
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poem on computer in hindi

कम्प्यूटर विज्ञान 

विद्वत जन विकसित करें कम्प्यूटर विज्ञान 
तब ही संभव हो सके ,हिन्दी का उत्थान 

हिन्दी का उत्थार करें स्वीकार चुनौती 
अग्रेजी की नहीं चलेगी यहाँ  बपौतो 

कह भगवत कविराज,झोंक दे अपना तन-मन 
कम्प्यूटर के योग्य रचे हिंदी विद्व्त जन 

ज्ञानी 

ज्ञानी जन करते सदा ,औरों का सम्मान 
इसलिए होता यहाँ ,ज्ञानी का गुणगान 

 ज्ञानी का गुणगान  ,तभी हो भाईचारा  
अहंकार अज्ञान ,सदा ज्ञानी से हारा 

कह भगवत कविराय ,मूढ़ होते अज्ञानी 
सद्गुण से सम्पन्न ,रहा करते है ज्ञानी 

विद्वान् 

तजते धीरज है नहीं ,विपदा में विद्वान् 
ग्रहण -छँटे फिर सूर्य -शशि ,होते आभावान 

होते आभावान,साहसी,हर न मानें 
विद्वानों के सुयश ,हमारे ग्रन्थ बखानें 

कह भगवत कविराय,गुणीजन प्रभु को भजते 
सद्गुण करते ,ग्रहण ,साधुजन दुर्गुण तजते 

सज्जनताई 

चंदन को काटा,हुआ खुशबूदार कुठार 
करे शत्रु के साथ भी ,सज्जनजन उपकार 

सज्जनजन उपकार ,सभी की करें भलाई 
इसलिए है पूज्य,जगत में सज्जनताई 

कह भगवत कविराय,उन्ही का अर्चन -वंदन 
जो दे ज्ञान सुगंध,की ज्यों मलयानिल चंदन 

आशा का दिनमान 

होता कभी न अस्त यह ,आशा का दिनमान
पंछी करते है सुबह ,फिर -फिर मंगलगान 

फिर -फिर मंगलगान,एक सा समय न रहता 
करे सफलता प्राप्त ,उद्यमी जो दुःख सहता 

 कह भगवत कविराय,मूढ़ किस्मत पर रोता 
कर्मठ उद्यमशील ,कभी भी विफल न होता 

उत्साहित 

उत्साही होते नहीं ,विपदा देख हताश 
सूख -सूख पते उड़े ,छूने को आकाश 

छूने को आकाश ,न विपदा से घबराते 
भर उमंग -उत्साह ,प्रगति की राह  बनाते 

 कह भगवत कविराय,कठिन पथ के ये राही 
मुश्किल को आसान ,किया करते उत्साही 
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